High CourtsSingle Bench

Pooja Kanwar vs State Of Rajasthan And Ors

Rajasthan High Court · Decided on 5 December 2018 · Citation: (2018) 12 RAJ CK 0223

HON’BLE JUDGES
Kanwaljit Singh Ahluwalia, J
RESULT
Disposed Off
CASE NUMBER
Criminal Miscellaneous (Petition) No. 7713 Of 2018

AI Structured Summary

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Judgment

11 paragraphs · 505 words

Present petition has been filed under Section 482 Cr.P.C. praying that direction be given to respondent Nos.1 to 4 to protect the life of the petitioner as she apprehends danger to the same at the hands of respondent Nos.5 and 6.

In pre-lunch session this Court had directed the Registrar(Judicial) to record the statement of the petitioner after she is identified by her Counsel.

In pursuance of said order, statement of the petitioner has been recorded by the Registrar(Judicial) and the said statement is taken on record and for ready reference is reproduced as under:

"राजस्थान उच्च न्यायालय पीठ, जयपुर एस0बी0 क्रिमिनल मिस0 पीटिशन नम्बर 7713/2018

पूजा कंवर बनाम सरकार व अन्य

दिनांक 05/12/2018

मैं पूजा कंवर पुत्री श्री लालसिंह शेखावत पत्नि श्री अरविन्द सिंह सांखला, आयु 22 वर्ष, जाति राजपूत, निवासी-प्लॉट नं0 बीएचए-13, पटेल नगर, सिवार मोड, पीएस भांकरोटा, बिन्दायका, जयपुर जिला जयपुर (राज0)। हाल निवासी- 122 आम चौक, घेरनिया बडा, पीएस नेचवा, तहसील लक्ष्मणगढ, जिला सीकर।।

शपथ पूर्वक बयान करती हूँ कि मेरी शादी अरविन्द सिंह के साथ दिनांक 25.11.2013 को जब मेरी उम्र 17 साल थी, हुयी थी। उस समय मुझे इस शादी की बारे में कोई समझ नहीं थी। शादी के बाद से ही मैं अपनी पीहर में रह कर ही पढाई कर रही थी। पिछले पाँच सालो में मेरे घरवालो ने मुझे 4-5 बार मेरे ससुराल भेजा। ससुराल में मेरे सास-ससुर का व्यवहार मेरे प्रति अच्छा नहीं था। मेरे पति अरविन्द सिंह ने भी मुझे साफ-साफ बोल दिया था कि जब अपनी शादी हुयी थी हम दोनो नाबालिग थे और इस शादी के बारे में कुछ नहीं समझते थे। तू मेरे भरोसे मत रह। मेरे पति मुझे पसंद भी नहीं करते थे और मेरे साथ मारपीट और लडाई-झगडा भी करते थे। दिनांक 10.09.2018 को सुबह पॉच बजे मेरे पति ने मुझे धक्का देकर घर से निकाल दिया। उसके बाद मैं अपने पीहर आ गयी। मेरे घरवाले मुझे मेरे पति के पास जबरदस्ती भेजना चाहते है लेकिन मैं इतना प्रताडित होने के पश्चात अब अपने ससुराल एवं अपने पति के पास नहीं जाना चाहती हूँ। मैं अपने पीहर भी नहीं जाना चाहती। मैं वर्तमान में अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ रह रही हूँ। मैं पढ़ी-लिखी हूँ और स्वयं कुछ भी कार्य करके अपना जीवन निर्वाह कर लूंगी। मेरे पीहरवाले मुझे एवं मेरे दोस्तो को जिन्होने मेरी सहायता की है उनको परेशान कर रहे है। मुझे एवं मेरे दोस्तो को मेरे पीहरवालो से सुरक्षा प्रदान की जावें । मुझे और कुछ नहीं कहना है।

नोट :- गवाह का बयान मेरे निर्देशन में उसके कहे अनुसार टंकणकर्ता द्वारा कम्प्युटर पर टंकित किया गया, जिसे गवाह को पढ़कर सुनाया व समझाया गया तो उसने उक्त कथनों को सुन व समझ कर सही होना स्वीकार किया।

(रजिस्ट्रार न्यायिक)

Having heard learned counsel for the petitioner and the learned Public Prosecutor and after going through the contents of the statement made by the petitioner, reproduced above, present petition is disposed of by issuing a direction to respondent Nos.3 and 4 to ensure necessary vigil that no physical harm is caused to the life of the petitioner.