AI Structured Summary
Not yet generated for this judgment
No AI summary yet
Generate an eight-section analysis of this judgment — facts, issues, reasoning, ratio and a plain-language gist.
Judgment
16 paragraphs · 838 wordsWith consent heard finally.
The applicant has filed this first application under Section 439 of Cr.P.C for grant of bail, who has been arrested and is in custody since 26-12-2019 in connection with Crime No.172/2019 registered at Police Station, Pandokhar, District Datia, for the offence punishable under Sections 399, 402 of IPC, Sections 25(1)(A), 30 of the Arms Act and Sections 11,13 of the MPDVPK Act.
It is the submission of learned counsel for the applicant that false case has been registered against him and he is suffering confinement since 26.12.2019. Applicant does not bear any criminal record. Only on the basis of vague allegations, applicant has been tried to be implicated. Applicant is aged 18 years only and has long way to go. He undertakes not to involve in any criminal activity in future and has learnt the lesson hard way and would mend his ways and would become a better citizen. He undertakes to cooperate in investigation/trial and would not be a source of embarrassment/harassment to the complainant party in any manner and further undertakes to perform community service.
Confinement amounts to pretrial detention. Thus, prayed for bail.
Learned Public Prosecutor for the State opposed the prayer and prayed for dismissal of the application.
Considering the submissions advanced, looking to the facts and circumstances of the case, but without commenting on the merits of the case, the application is allowed. It is directed that the applicant shall be released on bail on his furnishing personal bond in the sum of Rs.50,000/- (Rupees Fifty Thousand Only) with one solvent surety of the like amount to the satisfaction of Trial Court concerned.
This order will remain operative subject to compliance of the following conditions by the applicant:-
आवेदक उसके द्वारा निष्पादित बंधपत्र के सभी निबंधनों और शर्तों का पालन करेगा;
आवेदक अन्वेषण/विचारण में प्रकरणानुसार सहयोग करेगा।
आवेदक मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति के लिए प्रलोभन, धमकी अथवा वचन देने में स्वयं को लिप्त नहीं करेगा, जो कि उसे/उसको ऐसे तथ्यों को न्यायालय या पुलिस अधिकारी से प्रकटीकरण करने से प्रवरित करे, जैसी भी स्थिति हो;
आवेदक जिस अपराध का अभियुक्त है वैसी ही प्रकृति का समान अपराध कारित नहीं करेगा ;
आवेदक विचारण के दौरान अनावष्यक स्थगन की मांग नहीं करेगा;
आवदेक विचारण न्यायालय/अन्वेषण अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोडे़गा, जैसी भी स्थिति हो;
इसके अतिरिक्त उपरोक्त वर्णित जमानत का लाभ इस शर्त के अधीन होगा कि आवेदक प्रत्येक सोमवार और मंगलवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक आगामी छह माह के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, भाण्डेर में अपनी सेवाऐं देगा एवं उसकी भूमिका बाह्य विभाग के मरीजों को, डाक्टरों एवं कम्पाउन्डरों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में सहायता करने की होगी। उसे ना तो शल्य कक्ष (आपरेषन थियेटर) और ना ही निजी वार्डां में जाने की अनुमति होगी और ना ही किसी प्रकार की दवाई या इंजेक्शन इत्यादि मरीजों को लगाने की अनुमति होगी। वह किसी भी प्रकार से अपने द्वारा मरीजों को संक्रमण अथवा असुविधा नही देगा और डाक्टर इस बात को सुनिश्चित करेगे, ताकि आवेदक उक्त अस्पताल के लिए एक सहायक की भूमिका निभाए ना कि अपने किसी कृत्य से मरीजों अथवा डाक्टरों/अस्पताल प्रशासन को किसी प्रकार की असुविधा कारित करे। यह निर्देश आवेदक की आयु एवं भविष्य की संभावनाओं को देखकर दिया गया है ताकि उसे समाज की मुख्य धारा में आने का एक अवसर प्राप्त हो सके। मुख्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO)अस्पताल अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, भाण्डेर, आवेदक को बाह्य विभाग में कार्य करने की अनुमति प्रदान करेंगे और आवेदक को चिकित्सा सेवाऐं जैसे:- साफ सफाई की व्यवस्था बनाए रखना, प्राथमिक उपचार में सहयोग करना, रजिस्ट्रेषन कार्य एवं मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर किए जाने वाले कार्य देंगे। इन कार्यों को करने से संभवतः आवेदक को प्राथमिक चिकित्सा अथवा प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की प्राथमिक शिक्षा मिल सकेगी, ताकि वह समाज की मुख्य धारा में आने के साथ-साथ अपने क्षेत्र में आपदा प्रबंधन स्वंयसेवक (volunteer)के तौर पर कार्य कर सके।
यहा यह स्पष्ट किया जाता है कि आवेदक अस्पताल/अस्पताल प्रशासन एवं रोगियों के लिए किसी भी प्रकार के संक्रमण/असुविधा अथवा परेशानी का कारण नहीं बनेगा एवं अस्पताल प्रशासन द्वारा उसके दुव्र्यवहार अथवा अवज्ञापूर्ण आचरण की जानकारी मिलने की स्थिति में यह तथ्य उसके जमानत आवेदन को खारिज करने का आधार बन सकेगा। आवेदक द्वारा सुधार के लिए सुझाव और उसके द्वारा किए गए कार्य का प्रतिवेदन, अपे्रल 2020, में प्रस्तुत किए जायेंगे। 9. इस न्यायालय द्वारा यह निर्देश एक परीक्षण प्रकरण के तौर पर दिए गए हैं ताकि हिंसा और बुराई के विचार का प्रतिकार, सृजन एवं प्रकृति के साथ एकाकार होने के माध्यम से सामंजस्य स्थापित किया जा सके। वर्तमान में मानव अस्तित्व के आवश्यक अंग के रूप में दया, सेवा, प्रेम एवं करूंणा की प्रकृति को विकसित करने की आवश्यकता है क्योंकि यह मानव जीवन की मूलभूत प्रवृतियां हैं और मानव अस्तित्व को बनाए रखने के लिए इनका पुनर्जीवित होना आवश्यक है।
संबंधित मुख्य चिकित्सक अधिकारी को सूचित किया जाए एवं विचारण न्यायालय को एक मूलप्रति अनुपालन के लिए भेजी जाए।
