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Judgment
17 paragraphs · 907 wordsThe applicant has filed this first application under Section 439 of Cr.P.C for grant of bail, who has been arrested and is in custody since 01.11.2019, in connection with Crime No.142/2019, registered at Police Station Mihona, District Bhind (MP), for the offence punishable under Sections 363, 365, 506, 120-B of IPC.
It is the submission of counsel for the applicant that the false case has been registered against him and he is suffering confinement since 01.11.2019 whereas charge-sheet has already been filed. It is further submitted that as per the allegation they were instrumental in abducting the girl but the contents of FIR and statement of prosecutrix indicate improbable events. Beside that, applicant does not bear any criminal record. Co-accused has also been given benefit of bail by this Court. Confinement amounts to pretrial detention. He undertakes to cooperate in the investigation/trial and make himself available as and when required by the trial court. He would not be a source of embarrassment and harassment to the prosecution witnesses in any manner. He would not move in the vicinity of complainant. He further undertakes to do some community service. Under these grounds, he prayed for grant of bail to the applicant.
Learned PP for the State opposed the prayer made by the applicant and prayed for dismissal of this application.
Heard learned counsel for the parties and perused the case diary.
Considering the submissions advanced by learned counsel for the applicant as well as fact situation of the case, but without expressing any opinion on merits of the case, this application is allowed and it is directed that the applicant be released on bail on furnishing a personal bond in the sum of Rs.1,00,000/- (Rupees One Lakh Only) with one solvent surety of the like amount to the satisfaction of the concerned trial Court.
This order will remain operative subject to compliance of the following conditions:-
आवेदक स्वंय द्वारा निष्पादित बंद पत्र की समस्त निबंधनो एवं शर्तो का अनुपालन करेगा।
आवेदक अन्वेषण/विचारण में प्रकरण एवं निर्देशानुसार सहयोग करेगा।
आवेदक मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी अथवा वचन देने में स्वयं को लिप्त नहीं करेगा, जो कि उसे/उसको ऐसे तथ्यों को न्यायालय या पुलिस अधिकारी से प्रकटीकरण करने से प्रवरित करे, जैसी भी स्थिति हो;
आवेदक जिस अपराध के लिए दोषी है उस प्रकार का समान अपराध कारित नहीं करेगा । और आवेदक, अभियोक्त्री के आस पड़ोस में नहीं घूमेगा और फरियादी पक्ष के लिए किसी भी तरह की परेशानी और उत्पीड़न का किसी भी प्रकार से कारण नहीं बनेगा;
आवेदक विचारण के दौरान अनावश्यक स्थगन की माॅग नही करेगा।
आवेदक विचारण न्यायालय/अन्वेषण अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना भारत नही छोडेगा। जैसी भी स्थिति हो एवं;
इसके अतिरिक्त उपरोक्त वर्णित जमानत का लाभ इस शर्त के अधीन होगा कि आवेदक प्रत्येक सोमवार और मंगलवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक आगामी छः माह के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिहोना, जिला भिण्ड/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रमिहोना, जिला भिण्डध्जिला अस्पताल, भिण्ड में अपनी सेवाऐं देगा एवं उसकी भूमिका बाह्य विभाग के मरीजों को, डाक्टरों एवं कम्पाउन्डरों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में सहायता करने की होगी। उसे ना तो शल्य कक्ष (आॅपरेषन थियेटर) और ना ही निजी वार्डांे में जाने की अनुमति होगी और ना ही किसी प्रकार की दवाई या इंजेक्शन इत्यादि मरीजों को लगाने की अनुमति होगी। वह किसी भी प्रकार से अपने द्वारा मरीजों को संक्रमण अथवा असुविधा नही देगा और डाॅक्टर इस बात को सुनिश्चित करेेंगे, ताकि आवेदक उक्त अस्पताल के लिए एक सहायक की भूमिका निभाए ना कि अपने किसी कृत्य से मरीजों अथवा डाॅक्टरों/अस्पताल प्रशासन को किसी प्रकार की असुविधा कारित करे। यह निर्देश आवेदक की आयु एवं भविष्य की संभावनाओं को देखकर दिया गया है ताकि उसे समाज की मुख्य धारा में आने का एक अवसर प्राप्त हो सके। मुख्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्य अधिकारी (ब्डभ्व्) भिण्ड/अस्पताल अधीक्षक जिला, भिण्ड, आवेदक को बाह्य विभाग में कार्य करने की अनुमति प्रदान करेंगे और आवेदक को चिकित्सा सेवाऐं जैसे:- साफ सफाई की व्यवस्था बनाए रखना, प्राथमिक उपचार में सहयोग करना, रजिस्ट्रेषन कार्य एवं मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर किए जाने वाले कार्य देंगे। इन कार्यों को करने से संभवतः आवेदक को प्राथमिक चिकित्सा अथवा प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की प्राथमिक शिक्षा मिल सकेगी, ताकि वह समाज की मुख्य धारा में आने के साथ-साथ अपने क्षेत्र में आपदा प्रबंधन स्वंयसेवक (अवसनदजममतद्ध के तौर पर कार्य कर सके।
यहा यह स्पष्ट किया जाता है कि आवेदक अस्पताल/अस्पताल प्रशासन एवं रोगियों के लिए किसी भी प्रकार के संक्रमण/असुविधा अथवा परेशानी का कारण नहीं बनेगा एवं अस्पताल प्रशासन द्वारा उसके दुव्र्यवहार अथवा अवज्ञापूर्ण आचरण की जानकारी मिलने की स्थिति में यह तथ्य उसके जमानत आवेदन को खारिज करने का आधार बन सकेगा। आवेदक द्वारा सुधार के लिए सुझाव और उसके द्वारा किए गए कार्य का प्रतिवेदन, जून 2020, में प्रस्तुत किए जायेंगे।
इस न्यायालय द्वारा यह निर्देश एक परीक्षण प्रकरण के तौर पर दिए गए हैं ताकि हिंसा और बुराई के विचार का प्रतिकार, सृजन एवं प्रकृति के साथ एकाकार होने के माध्यम से सामंाजस्य स्थापित किया जा सके। वर्तमान में मानव अस्तित्व के आवश्यक अंग के रूप में दया, सेवा, प्रेम एवं करूंणा की प्रकृति को विकसित करने की आवश्यकता है क्योंकि यह मानव जीवन की मूलभूत प्रवृतियां हैं और मानव अस्तित्व को बनाए रखने के लिए इनका पुनर्जीवित होना आवश्यक है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारीए भिण्ड को सूचित किया जाए एवं विचारण न्यायालय को एक मूलप्रति अनुपालन के लिए भेजी जाए।
प्रमाणित प्रति नियमानुसार।
